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चहल-पहल कु दौर थै,
इन्तज़ार कखी हौर थै,
कुछ भागिरथी किनारा थैन हन्सणा,
कखि माछों पर जाला थैन फंसणा १
गाडियों कु घुन्घयोट,
कलेन्डरु कु सुस्योट,
समोसों थै चरबरी मर्च,
सभी कन थैन लग्य़ां खर्च १
यु शहर ही यनि छः भायों,
बहुत बत मैं भि थौ जायों,
आहा!! उन्डु यख-फन्डू वख,
खुजाण कख-कख थै टक १
छ्वरों कु छ्वरोट,
टोला छ्न बण्या,
छवरियों कु गुमडोट,
बुढ्या सिन्गोरियों पर झुक्यां १
हिन्दु छ्न,मुस्लिम भि छन भैज्यों,
सरदार कु बोल कि तुस्सी,
यख मैं भि छों आयों,
हां यनित थै यख,
मेल-मिलाप भारी थै,
अरे कैकि जात,कैकु धर्म
भातम छ्वटी स्याकि गारि थै १
अरे मीत पागल,सुपिणा छों दिखणु,
बात बहुत पुराणी छ:,खुजाण क्यों लिखणु,
आज,आज कुछ: भी त नी छ,
ना गाडी,ना टोला ना टोली,
काट्युं घास दुबारा भि नि सकी मौलि १
खिचडा कु दिन छ:
पर कख जाण,
रसाणं माछों का साग कि,
भुज्जी मा कम थै ल्वाण,
खुजाण कैकि दान दयणा कि स्याणी थै,
हां डुबीगे म्यरु टिहरी सदानि तै,
सदानि तै,सदानि तै,सदानि तै,
ना रो अभागी मास्त १
By- "Deepp Negi"
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